आनंद गुप्ता संवाददाता
मुंगेली/ श्रीमद्भागवत कथा वेदों का सार हैं!भागवत कथा सुनने से जन्म-जन्मांँतर का पुण्य मिलता हैं!यह युगों-युगों से मानव जाति तक पहुंँचता रहा हैं!भागवत महापुराण उसी सनातन ज्ञान की पयस्विनी हैं, जो वेदों से प्रवाहित होती चली आ रही हैं! इसीलिए भागवत महापुराण को "वेदों का सार" कहा गया हैं!कलयुग में श्रीमद्भागवत कथा सुनने से जीवन में उत्साह का संचार होता हैं तथा बुरे विचार नष्ट हो जाते हैं"।
नगर के पुनित होटल में स्व. सुशील मिश्रा के वार्षिक श्राद्ध के अवसर में आयोजित श्रीमद भागवत सप्ताह ज्ञान यज्ञ कथा में परम श्रद्धेय आचार्य पं.भूपेन्द्र पाण्डेय बोदरी वाले महाराज ने कहा कि जीवन में घनिष्ठता और मोक्षता के लिए भागवत कथा के पांच तत्वों को जीवन में आत्मसात करना चाहिए!ये पांच तत्व हैं कान से श्रवण, स्थान का महत्व, कथा के लिए ज्ञान, दान और और प्राण!
कान से श्रवण- विशद व्याख्या करते हुए महाराज जी ने कहा कि जहां कही भी भगवान की कथा हो रही हैं उसका श्रवण ही एकमात्र उपाय है, जो व्यक्ति कथा नही सुन पाते, समय नही दे पाते ऐसी स्थिति में प्रसंँगों के सार को कान से सुनना चाहिए!
स्थान का महत्व-जहां कही भी श्रीमद्भागवत कथा हो रही हैं, वह स्थल पवित्र होना चाहिए!वातावरण शांत और सुनने वाले शांत चित्त होने चाहिए!एक सुई भी गिरे तो पता ना चले?
ज्ञान-मनुष्य के दु:खों और कष्टों से परेशान रहता है!इस का कारण हमारे अंदर छुपी अज्ञानता हैं!जहां कथा हो रही हैं वहां लोग ध्यानपूर्वक सुने और ज्ञान प्राप्त करे!भजन कीर्तन, सत्संग और संतो के सानिध्य से ज्ञान मिलता हैं।
दान करने से मोक्ष की प्राप्ति होती हैं!दान देकर बताने की कोशिश नही होनी चाहिए!स्वर्ण दान करने से सबसे ज्यादा मोक्ष मिलता हैं!
प्राण-यह नश्वर शरीर {प्राण} जितना किसी के काम आ सके पुण्यार्थ और परमार्थ के काम में लगाना चाहिए!श्रीमद्भागवत रुपी रस का रसास्वादन करने से कथा का पुण्य लाभ मिलता है ।
गौरतलब है कि मुंगेली के पड़ाव चौक स्थित पुनीत होटल में स्व. सुशील मिश्रा पाठक पारा वाले के वार्षिक श्राद्ध के अवसर पर मुख्य यजमान अनिल दुर्गेश्वरी मिश्रा के द्वारा श्रीमद्भागवत कथा सप्ताह ज्ञान यज्ञ का आयोजन 6 अप्रैल से किया जा रहा है जिसके प्रथम दिन भब्य कलश यात्रा ,पंचाग पूजन कर प्रारंभ किया गया था। 13 अप्रैल तक चलने वाले इस श्रीमद भागवत कथा का समय दोपहर 3 बजे से शाम 7 बजे तक निर्धारित है।
सरस संगीत मय इस श्रीमदभागवत कथा के मुख्य कथा वाचक बोदरी के पंडित भूपेंद्र पांडेय जी हैं। प्रतिदिन कथा श्रवण एवं यज्ञ में भाग लेने बडी संख्या में आसपास से महिलाओं एवं पुरुषों उपस्थित रहकर पुण्य लाभ ले रहे हैं।
