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हमार राज पार्टी के लोकसभा प्रत्याशी सुदीप श्रीवास्तव अपनी योजना लड़ने का उद्देश्य आदि विषय पर चर्चा

 


आंनद गुप्ता संवाददाता 

मुंगेली/ बिलासपुर लोक सभा प्रत्याशी सुदीप श्रीवास्तव ने कहीं बिलासपुर लोकसभा का यह चुनाव मैं क्यों लड़ रहा हूं इसका उत्तर दो हिस्सों में है एक हिस्सा तो साफ दिखाई देता है की बिलासपुर का यह क्षेत्र जो छत्तीसगढ़ राज्य का दूसरा सबसे प्रमुख शहर है राज्य बनने के बाद भी विकास की दौड़ में पीछे है राज्य बनने के बाद विकास का जो हिस्सा बिलासपुर लोकसभा क्षेत्र को मिलना चाहिए था उससे वह आज तक वंचित है इसके मूल में क्या है इसके मूल में कहीं ना कहीं इस बात की कसक है की बिलासपुर लोकसभा से ऐसे जनप्रतिनिधि चुनकर नहीं गए जिन्होंने अपनी सारी की सारी शक्ति बिलासपुर के लिए लगाई किसी राजनीतिक दल का होना बुरा नहीं है लेकिन अगर क्षेत्र की जनता और उसके विकास की आकांक्षाओं और अपने पार्टी के बीच में चुनाव करना हो तो हर हाल में अपना क्षेत्र और अपनी जनता को चुनना चाहिए आज आप देखिए पिछले 3 साल से बिलासपुर रेलवे जोन में चलने वाली ट्रेन मनमाने तरीके से रद्द हो रही है कभी भी कोई भी ट्रेन बंद कर दी जाती है लेकिन इसका विरोध यहां से चुने हुए सांसद में कभी नहीं किया इसी तरह से अगर आप देखें तो जो मुख्य विपक्षी दल का दावा करते हैं उनके द्वारा भी बिलासपुर क्षेत्र के विकास के लिए बिलासपुर क्षेत्र के हक के लिए कोई प्रयास नहीं हुआ राज्य निर्माण के बाद आईआईटी बना तो भिलाई आईआईएम बनाया गया तो रायपुर मेडिकल यूनिवर्सिटी बनाई गई तो रायपुर हाईकोर्ट बिलासपुर होने के बाद भी लॉ यूनिवर्सिटी बनाई गई तो भी रायपुर और सबसे ज्यादा आपत्तिजनक है की एनटीपीसी के पैसे से उसे एनटीपीसी के जिसका प्रदूषण धूल कचरा और गर्मी बिलासपुर झेलता है उसे एनटीपीसी के पैसे से बनाई गई ट्रिपल आईटी भी रायपुर में बनाई गई मैं पूछता हूं कि कांग्रेस और बीजेपी के किस नेता ने किसी बड़े नेता ने इस बात के लिए विरोध किया और इसके खिलाफ आंदोलन किया बिलासपुर का रेलवे जोन बिलासपुर का हाई कोर्ट बिलासपुर की सेंट्रल यूनिवर्सिटी जो बाबा गुरु घासीदास के नाम पर है सब हमारे संघर्षों का नतीजा है मुंगेली क्षेत्र की बात करें बिलासपुर में जन्म लेने के बाद मेरा बचपन मुंगेली में ही बीता है मेरी प्राथमिक शिक्षा मुंगेली के नगर पालिका स्कूल में हुई और इस क्षेत्र की जो लगभग 100 साल पुरानी मांग है रेलवे लाइन की आज भी ओलंपिक है अगर आपको याद होगा तो 2009 में एक साइकिल यात्रा आंदोलन मेरे द्वारा ही किया गया था कि मुंगेली होते हुए रेल लाइन बनाई जाए उसे आंदोलन के बाद सर्वे हुआ सर्वे होने के बाद स्वीकृति भी हुई लेकिन लाइन अभी भी नहीं बनी है आज जो एलाइनमेंट लाइन का बताया जा रहा है उसमें मुंगेली से लाइन बिलासपुर नहीं आती है उसको कोयला के व्यापारियों ने और बड़े कॉर्पोरेट ने अपने लाभ के लिए करगी रोड होते हुए कटघोरा की ओर मोड़ दिया है जबकि उसकी सही आवश्यकता है कि मुंगेली से बिलासपुर का कनेक्शन इस मांग को यह जो दोनों प्रत्याशी हैं आपके सामने क्या यह उठा रहे हैं क्या उनको इस बात की समझ है कि इस रेल लाइन की एलाइनमेंट में गड़बड़ है पूरे निवेदन के साथ में कहता हूं की संसद पद एक बहुत जिम्मेदारी का पद है और उसके लिए योग्य आदमी को चुना जाना जरूरी है किसी एक जाति या एक समाज के नाम पर जो चुनाव लड़ रहे हैं वह आपके साथ न्याय नहीं कर सकते

इस लोकसभा चुनाव को लड़ने का एक दूसरा और बड़ा कारण यह भी है की आने वाले समय में संसद में भारतीय संविधान पर कई बदलाव प्रस्तावित है चाहे वह एक देश एक चुनाव हो जिससे कि राज्यों के अधिकारों को फर्क पड़ेगा चाहे वह समान नागरिक संहिता हो जिससे की विभिन्न समाजों को केवल मुस्लिम ही नहीं दलित समाज आदिवासी समाज अन्य पिछड़ा वर्ग सभी समाजों को इसका असर होने वाला है और चाहे दी इमिटेशन हो पर सिवान हो इसके बाद इस बात का खतरा है कि जिन इलाकों में जनसंख्या घनत्व कम है उनकी सिम घट जाएगी मैं पूरे निवेदन के साथ यह सवाल उठाता हूं की जो आज 22 लोग छत्तीसगढ़ में कांग्रेस और भाजपा की तरफ से केवल बिलासपुर ही नहीं पूरे छत्तीसगढ़ में जो कांग्रेस और भाजपा की तरफ से लोकसभा प्रत्याशी है उनमें से कितने लोग ऐसे हैं जो संविधान पर गहरी समझ रखते हैं और बहस कर सकते हैं 1947 में जब देश का संविधान बना था तो संविधान सभा में 70% बैरिस्टर थे उनमें बिलासपुर के तक ठाकुर छेदीलाल बैरिस्टर रायपुर के पंडित रविशंकर शुक्ल शामिल थे जशपुर के कैप्टन जयपाल सिंह मुंडा जशपुर रांची के वह भी शामिल थे आज जो लोग लड़ रहे हैं क्या वे संविधान को बचाने के लिए या संविधान में उचित बदलाव के लिए सही बहस कर पाएंगे यह सूचना बहुत जरूरी हैमैं जो कि अधिवक्ता हूं हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में वकालत करता हूं तो कम से कम मैं इतना तो का ही सकता हूं कि मैं संविधान का विद्यार्थी हूं और संविधान की थोड़ी बहुत समझ जरूर रखता हूं तो आज ऐसे समय में जब अनुसूची पांच अनुसूची 6 में आदिवासियों के संविधान एक अधिकार आरक्षण इन सब सवालों पर बहस होने वाली है तो बिलासपुर की आवाज कौन बनेगा समान नागरिक संहिता लागू होने पर सत्ता में समाज हो आदिवासी समाज हो उनकी मान्यताओं पर उनकी परंपराओं पर क्या असर होगा उसे बात को कौन रखेगा कौन इन समाज के हितों की रक्षा करेगा यह आपको देखना चाहिए कि ऐसा कौन प्रत्याशी है जो इन सब बातों को कर सकता है आज का चुनाव बहुत महत्वपूर्ण चुनाव है और इसीलिए मैं आपके समक्ष आया हूं.

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